My Thoughts

19th July

Every year this day floods my heart and mind with memories….of good and bad….of ups and downs..of happiness and pain..of hurts and pleasures…of friends and enemies… 16 years back, in 2001 I stepped into this big city called Delhi.  In the car we had carried a mattress, a gas cylinder, some basic utility stuff and my 8 month old daughter. No one by my side, even with moral support except my husband and my mother. And then began a long and tough journey…To earn a living, to make a career, to be called “successful” in this world. The journey that started with rejections and humiliations…the disappointments and sometimes small achievements. One thing that has always helped me and been my biggest strength is my relationships.. Friends came forward to help in whatever way they could. My brother Ashish helped by taking me for interviews on a scooter that he used to borrow from his friends. He couldn’t bear to see me going by bus. Thats what we call the love of a brother. For a year, we lived in a one room apartment in Noida. The size of the room was smaller than the balcony that I have now in my house. There are innumerable incidents that can’t be recalled in a single blog. Probably and hopefully, someday I might find time to sit down and pen down my journey. But as of now, I can say just this much – Last 16 years have taught me PERSEVERANCE and PATIENCE through all the failures I faced..the SKILL TO LISTEN through my talk show Zindagi Live, to be GRATEFUL through my spiritual master OSHO, to be HUMBLE through my interaction with great people like  Pt Ravi Shankar and Amitabh Bachchan. In 1996, a girl from a small town had promised to herself that
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Hawa Hawaai – A MUST watch film…

“चूल्हे के अंगारे जैसे पहले तड़पाते हाथों को.. तब नसीब रोटी होती है जीवन सार यही है मनवा तू कर, मत डर… अंगारों पे चलना है सही… यही जीवन ज्योति है”
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Why India voted for Modi

All of us have our likes, dislikes, favorites, friends, foes and fears…We tend to choose our politicians on the basis of their religion, caste, community and several other reasons. Very rarely, uptil now, development, or the lack of it, formed the main basis of our choice and our vote.
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पॉवर ऑफ 49

हाल ही में मुझे एक बहुत दिलचस्प कैंपेन का हिस्सा बनने का मौका मिला। कैंपेन का नाम है पॉवर ऑफ 49। हम में से बहुत कम लोगों का ध्यान इस तरफ जाता होगा कि इस देश में 49 फीसदी वोटर महिलाएं हैं। इसके बावजूद महिलाओं के लिए संसद में 33 फीसदी आरक्षण का बिल अब तक पास नहीं हो सका है।
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Quit tobacco

क्या आपने किसी ऐसे आदमी को देखा है जिसको बोलने के लिए मशीन का इस्तेमाल करना पड़ता हो, जिसके गले से आवाज़ अपने आप न निकल पाती हो, जिसको अपने गले से सांस लेनी पड़ती हो क्योंकि उसकी नाक ने काम करना बंद कर दिया हो ?
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Suicide

2010 में विवेका नाम की एक मॉडल ने खुदकुशी की थी….उस वक्त मैंने एक लेख लिखा था । २ दिन पहले सुबह अचानक एक्ट्रेस जिया खान की खुदकुशी की खबर सुनी। दिल बैठ गया । बहुत दुख होता है एक खूबसूरत ज़िंदगी का यूं अंत होते देख।
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काश हम भी ऐसे होते

शायद मैंने आपको पहले भी बताया था कि मैं पिछले साल ३ महीनों के लिए लंदन गई थी एक स्कॉलरशिप पर। दूसरे देशों में जाना, घूमना, रहना,वहां के लोगों से मिलना जुलना कई मायनों  में आपकी सोच को बदलता है, विकसित करता है। हर वक्त आप अपने देश की तुलना उस देश से करते है, अपने लोगों के व्यवहार की तुलना वहां के लोगों से करते हैं।
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क्या माता पिता फेल हो रहे हैं ?

आज मैं आप सबका ध्यान एक बहुत गंभीर समस्या की तरफ खींचना चाहती हूं। और वो समस्या है हमारे बच्चों की ज़िंदगी से जुड़ी। आए दिन हम लोग अखबारों में या अपने शहर, गांवों,  कस्बों में छोटी उम्र के बच्चों और युवाओं की खुदकुशी की खबरें पढ़ते रहते हैं या सुनते रहते हैं।
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नशा भी एक बीमारी

१ मैं शराब से तंग आ चुका था, न मुझसे छोड़ी जा रही थी न पी जा रही थी। २ सुबह ६ बजे मैं उठाती थी बोतल, सीधे मूंह में लगाती थी,इधर से आज़ान की आवाज़ और उधर से गुरबानी, और मैं वोडका की बोतल मूंह में लगाए खड़ी… ३ मेरी पत्नी को ऑपरेशन के लिए खून की ज़रूरत थी और मैं शराब और ड्रग्स ले रहा था…
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कैंसर का सामना करो

नीरजा जी को चेन्नई के लोग कीमो एंजिल के नाम से जानते हैं कीमो यानि कीमो थेरेपी और एंजिल यानि मसीहा। लेकिन कीमो थेरेपी तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी में होती है तो कोई कीमो एंजिल कैसे हो सकता है..ज़िंदगी जीने का ढंग अगर नीरजा मलिक जैसा हो तो कैंसर जैसी बीमारी बहुत मामूली लगने लगती है।
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