नया सफर नई उम्मीदें

‘जिंदगी लाइव’ का दूसरा सीज़न शुरू हो रहा है। पिछले एक साल में ये शो एक शो न रहकर हम सबकी ज़िंदगी का एक हिस्सा बन गया। अगर मैं ये कहूं कि ‘ज़िंदगी लाइव’ की वजह से हमने एक साल में जितना देखा, सुना, समझा और सीखा उतना अब तक की हम सबकी जिंदगी में नहीं हुआ था तो ये कतई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

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मैंने अपने एपिसोड प्रोड्यूसर्स को अपने एपिसोड से जुड़े लोगों के लिए रोते हुए देखा है…उनके लिए दुआएं मांगते देखा है…उनके परिवारों का हिस्सा बनते हुए देखा है। हम इस शो पर सिर्फ काम नहीं करते, दिन-रात उसको जीते हैं, तभी ऐसे वाकये होते हैं जो खुद हमें भी चौंका देते हैं।

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मेरी एपिसोड प्रोड्यूसर नीतू एक बार तोहफे में देने के लिए भगवान शंकर की मूर्ति खरीदने गई। दुकानदार जब मूर्ति को पैक करने लगे तो नीतू ने सिर्फ इतना कहा कि नहीं ये हमारे शो के हिसाब की पैकिंग नहीं तो वहां बैठी एक लड़की फौरन बोली, “क्या आपका शो ‘जिंदगी लाइव’ है? मैंने देखा है आपका शो। लाइए ये तोहफा मैं पैक कर देती हूं। मुझे पता है आप लोग कितने दिल से लोगों को तोहफे देते हैं “इस छोटी सी बात ने हम सबका दिल छू लिया।

ऐसी तमाम बातें हम अक्सर सुनते हैं, अच्छा भी लगता है। साल भर की मेहनत का यही तो ईनाम है जब हाल ही में मैं कार में पेट्रोल भरवाने गई तो पेट्रोल भरने वाले भाईसाहब ने कहा, “आप ‘जिंदगी लाइव’ में आती हैं न? मुझे आपका कार्यक्रम बहुत पसंद है”। मेरे साथ मेरी सहयोगी फरहीन भी थी। उसने कहा -ऋचा, हम सबके लिए ये एक अवॉर्ड से कम नहीं।

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लेकिन ये बातें कभी-कभी अकेले में परेशान भी करती हैं। कई बार ख्याल आता है कि पहला सीज़न तो हो गया…लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा भी बन गया..बेस्ट न्यूज़ टॉक शो का अवॉर्ड भी मिल गया…..लेकिन उम्मीदें भी बढ़ गई हैं…अब आगे क्या होगा? क्या दूसरा सीज़न भी लोगों के दिल को छू पाएगा? क्या हम इस बार भी लोगों के दर्द को महसूस कर पाएंगे? मुझे याद है 9 सितंबर 2007, रविवार का दिन सुबह 10 बजे जब ‘जिंदगी लाइव’ का पहला एपिसोड चलना था, मेरी पूरी टीम ऑफिस में थी, सब घबराए हुए थे। आरती, जिसने एपिसोड प्रोड्यूस किया था, वो उसको देखते-देखते भी रो रही थी। मेरी धड़कनें बढ़ी हुई थीं।

आज एक साल बाद फिर वैसी ही हालत है। खुशी भी है, घबराहट भी और सच कहूं तो डर भी। इन सारे एहसासों के साथ हम दूसरा सीज़न आपको भेंट कर रहे हैं….

आपको हमारा एपीसोड कैसा लगा, क्या अच्छा था, क्या नहीं, क्या किया जा सकता है…हम आपकी राय का इंतजार करेंगे। अगर आप अपनी कहानी हमसे बांटना चाहें तो आपका स्वागत है। हम चाहते हैं हम आपसे जुड़ें, आपका हर दर्द बांटें। ऐसी हर कहानी हम दुनिया तक पहुंचाएं जिसे सुनकर ये लगे…यही तो है ‘जिंदगी लाइव….’

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