Richa’s Blog

१४ साल की लड़की की सोच

मुझे परिवार के साथ साफ सुथरी फिल्में देखना बहुत पसंद है। इस मदर्स डे पर सोचा कि क्यों न सब के साथ गिप्पी देखी जाए। कुछ दोस्तों से सुना था और ट्विटर, फेसबुक पर पढ़ा था कि फिल्म अच्छी है। तो सोचा मदर्स डे पर मां और बिटिया, दोनों के लिए इससे बेहतर तोहफा क्या होगा। और फिल्म देखने के बाद मुझे अपने फैसले पर वाकई खुशी हुई।
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कैंसर का सामना करो

नीरजा जी को चेन्नई के लोग कीमो एंजिल के नाम से जानते हैं कीमो यानि कीमो थेरेपी और एंजिल यानि मसीहा।लेकिन कीमो थेरेपी तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी में होती है तो कोई कीमो एंजिल कैसे हो सकता है..ज़िंदगी जीने का ढंग अगर नीरजा मलिक जैसा हो तो कैंसर जैसी बीमारी बहुत मामूली लगने लगती है।
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कुछ दिन पहले

कुछ दिन पहले मैं भोपाल गई थी अपनी बुआ की बेटी की शादी में। शादी हो और मेंहदी लगाने वाली न आएं, ये कैसे मुमकिन है भला..तो वहां भी दो महिलाएं आईं जो पूरे दिन बैठ कर हर लड़की-महिला के हाथ में मेंहदी लगाती रहीं।
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टीवी कार्यक्रमों की बात

टीवी कार्यक्रमों की बात छिड़े तो अपने बचपन के दिनों के कई प्रोग्राम याद आते हैं । रामायण महाभारत तो खैर इतने लोकप्रिय थे कि उन्हें आजीवन भूलना ही नामुमकिन है। इन दोनों धारावाहिकों के प्रति लोगों का क्रेज़ मुझे आज भी याद है।
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अदालत का एक और फैसला..

८४ के दंगों से जुड़ा अदालत का एक और फैसला..जगदीश टायटलर के खिलाफ केस फिर खोला जाए। एक बार फिर उन दंगों का जिन्न जिंदा हो गया।
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इत्तेफाक

इस साल इत्तेफाक से मैं बहुत सफर कर रही हूं। और उनमें से ज़्यादातर सफर ट्रेन से हो रहे हैं। देश के किसी भी शहर या कस्बे में चले जाइए , रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म, टॉयलेट्स की हालत देख कर अफसोस ही होता है।
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My Wisdom

On this day….let me not be just older by a year..let me be evolved,enlightened for the lifetime..let me not be richer only by money..let me be richer in knowledge and wisdom..
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नया सफर नई उम्मीदें

‘जिंदगी लाइव’ का दूसरा सीज़न शुरू हो रहा है। पिछले एक साल में ये शो एक शो न रहकर हम सबकी ज़िंदगी का एक हिस्सा बन गया। अगर मैं ये कहूं कि ‘ज़िंदगी लाइव’ की वजह से हमने एक साल में जितना देखा, सुना, समझा और सीखा उतना अब तक की हम सबकी जिंदगी में नहीं हुआ था तो ये कतई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
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सर्दी की नर्म धूप और….

अपने एयर कंडीशन्ड ऑफिस की कांच की बंद खिड़की से आज झांक कर बाहर देखा..तो अचानक दिल बैठ सा गया। एक पल के लिए अपना सारा बचपन आंखो के सामने घूम गया। खिड़की से देखा आज सर्दी की नर्म धूप खिली हुई है जिसे देख तो पा रही हूं…महसूस नहीं कर सकती।
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यही तो है सच्चा प्यार….

वो चल फिर नहीं सकती, न जाने कितनी बीमारियां हैं उसको। जिंदगी भी बस कुछ ही दिनों की होगी उसके पास, अगर जल्द ही कोई चमत्कार न हुआ तो। लेकिन उसके पास एक ऐसी चीज है जिसके लिए शायद हर कोई सारी उम्र तरसता है। उसके पास सच्चा प्यार है। मैं बात कर रही हूं निवेदिता और उसके पति पंकज की।
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